सरकारी पैसे और मशीनरी के इस्तेमाल से राजनीतिक दलों के प्रचार पर रोक

फाइल फोटो - मुख्य चुनाव आयुक्त डा. नसीम जैदी और चुनाव आयुक्त एके जोती और ओपी रावत।

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को सख्‍त संदेश दिया है कि सरकारी पैसे या मशीनरी के इस्‍तेमाल करने पर कार्रवाई की जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा है कि पार्टी के प्रचार में सरकारी पैसे खर्च ने किए जाएं। आयोग ने यह भी कहा कि सरकारी पैसे या मशीनरी के दुरुपयोग पर मान्‍यता निलंबित हो सकती है।

खबरों के अनुसार, चुनाव आयोग ने निर्देश दिया कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को ऐसी गतिविधियों के लिए सार्वजनिक कोष और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करने नहीं दिया जाएगा जिससे उस पार्टी या पार्टी को आवंटित चुनाव चिह्न का प्रचार हो रहा होगा।

फाइल फोटो - मुख्य चुनाव आयुक्त डा. नसीम जैदी और चुनाव आयुक्त एके जौहरी और औपी रावत।

फाइल फोटो – मुख्य चुनाव आयुक्त डा. नसीम जैदी और चुनाव आयुक्त एके जौहरी और औपी रावत।

आयोग ने यह कदम इन आरोपों के बीच उठाया है कि बसपा ने उत्तर प्रदेश की सत्ता में रहने के दौरान सार्वजनिक स्थलों में हाथियों, जो पार्टी का चुनाव चिह्न है, की मूर्तियां बनवाई।

दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद आयोग ने यह आदेश जारी किया है। न्यायालय ने जुलाई में वह अर्जी आयोग को वापस भेज दी थी जिसमें राज्य भर में हाथियों की मूर्तियां बनवाने के मामले में पिछली मायावती सरकार पर सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए बसपा के चुनाव चिह्न ‘हाथी’ को रद्द करने की मांग की गई थी।

खबरों के अनुसार आयोग ने निर्देश दिया है कि अब कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी ऐसी गतिविधि में सार्वजनिक धन या सार्वजनिक स्थल या सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं करेगी जिससे उस पार्टी या पार्टी को आवंटित चुनाव चिह्न का प्रचार हो रहा हो।

अपने आदेश में आयोग ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि निर्देशों के उल्लंघन को आयोग के वैध निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक एनजीओ की अर्जी पर आदेश पारित किया था। आयोग ने इस मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों की राय मांगी थी।

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