उत्तराखण्ड संकट: केंद्र सरकार ने बजट सत्र का अवसान किया

मंगलवार शाम कैबिनेट की राजनीतिक मामलों संबंधी समिति की बैठक ने निर्णय लिया।

एक असाधारण घटनाक्रम में केंद्र सरकार ने बजट सत्र खत्म याकि सत्रावसान किया। एक महीने के विराम के बाद संसद का बजट सत्र 25 अप्रैल से फिर शुरू होने वाला था लेकिन उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू होने की वजह से राज्य का खर्च चलाने के लिये सरकार को अध्यादेश लाना होगा जोकि संसद के सत्र में रहते संभव नहीं था।

संविधान के अनुच्छेद 357 के अन्तर्गत केंद्र सरकार अध्यादेश के जरिये जरूरी खर्चों के लिये भारत के संचित राजकोष से धन निकाल सकती है।

मंगलवार शाम को गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया।

मीडिया के मुताबिक इसके बाद संसदीय कार्यमंत्री एम. वेंकैया नायडू राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले और उन्हें सरकार के फैसले की जानकारी दी। वेंकैया नायडू ने उत्तराखण्ड की परिस्थितियों के बारे में भी राष्ट्रपति को जानकारी दी

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में वेंकैया नायडू के साथ गृह और विधि मंत्रालय के अधिकारी मौजूद थे।

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया।

कैबिनेट कमेटी की बैठक के बाद संसदीय मामलों के मंत्री वेंकैया नायडू राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले ताकि उन्हें बैठक में लिए गए फैसले से अवगत करा सकें और उत्तराखंड के ताजा हालात की जानकारी दे सकें।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति ने देर रात इस आश्य का आदेश जारी किया।

एक संबंधित घटनाक्रम में मंगलवार को उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने 31 मार्च को विधान सभा में शक्ति परीक्षण के आदेश दिये हैं।

इसके बावजूद बजट सत्र का अवसान करने के राज्य का खर्च चलाने के लिये अध्यादेश लाने की केंद्र सरकार की तैयारी बताती है कि केंद्र इस मामले पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिये तैयार है।

यदि किसी भी वजह से राष्ट्रपति शासन आगे बढ़ता है और केंद्र को राज्य का खर्चा चलाना होगा तो केंद्र ने उसके लिये कानूनी आधार तैयार करने का रास्ता साफ कर लिया है।

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