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भारतीय छात्र की हत्या नस्लीय घृणा की वजह से नहीं: ऑस्ट्रेलिया
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, जनवरी 05, 2010
 
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ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वो नितिन गर्ग के परिवार से पूरा सहयोग करेगा जिसकी पिछले हफ्ते मेलबोर्न में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. ऑस्ट्रेलिया के कार्यवाहक विदेशमंत्री सॉइमन क्रीन ने कहा कि नितिन के शव को जल्द ही उसके परिवार वालों को सौंप दिया जायेगा.

उन्होंने नितिन के शव को उसके परिवार वालों को सौंपने में हुई देरी पर भी खेद जताया. श्री क्रीन ने कहा कि भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग के अधिकारी नितिन के परिवार के संपर्क में हैं.

लेकिन ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने इस बात से इंकार किया कि नितिन की हत्या नस्लीय घृणा की वजह से की गई है. मेलबोर्न में काम पर जाते समय शनिवार देर रात नितिन को पेट में चाकू मार दी गई थी बाद में रॉयल मेलबोर्न अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी.

सॉइमन क्रीन ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इस मामले में किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले पुलिस की जांच खत्म होने का इंतजार किया जाना चाहिये.

Nitin-Garg.jpg
नये साल के आरंभ में ही भारतीयों पर हमले के लिये बदनाम रहे मेलबोर्न में एक भारतीय छात्र की हत्या से दोनों देशों के संबंधों में कटुता दिखाई पड़ रही है. विदेशी छात्रों पर हमले रोक पाने में प्रधानमंत्री केविन रड्ड की सरकार की असफलता की कई बार उनकी आलोचना की वजह बन चुकी है.

पिछले साल उनके भारत दौरे के समय भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने द्विपक्षीय बातचीत में ये मामला उठाया था. इस पर केविन रड्ड ने भरोसा दिलाया था कि ऐसी घटनाओं से 'ऑस्ट्रेलियाई कानूनों की पूरी शक्ति से निपटा जायेगा'. उन्होंने ये भी कहा था कि सभी भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया के 'सम्मानित मेहमान' हैं.

नितिन गर्ग की हत्या के दोषियों को सजा दिलवाने में सरकार की कटिबद्धता को केविन रड्ड सरकार के वादे की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

इससे पहले सोमवार को भारतीय विदेशमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया को चेताया था कि इस मामले में ढिलाई बरतने के आर्थिक दुष्परिणाम ऑस्ट्रेलिया को भुगतने पड़ सकते हैं.

उन्होंने कहा था कि भारतीय छात्र की हत्या के बाद सरकार के पास यही बचता है कि वो भारतीयों को सलाह दे कि वो उच्च शिक्षा के लिये ऑस्ट्रेलिया जाने से बचें. श्री कृष्णा ने कहा था कि वो सबसे अंतिम कदम के रूप में ही इस सलाह को देना चाहेंगे.

ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को विदेशी छात्रों की वजह से प्रतिवर्ष 10 अरब डॉलर से भी ज्यादा की आमदनी होती है. केवल भारतीय ही नहीं चीन और दूसरे अन्य एशियाई देशों के छात्रों पर भी हमले होने की खबरें वहां से मिलती रही हैं.
 
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