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अदालत ने सीबीआई को आरुषि के माता-पिता का नारको टेस्ट करने की अनुमति दी
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, जनवरी 05, 2010
 
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ग़ाजियाबाद के एक विशेष न्यायालय ने आज मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो को आरुषि के माता-पिता का नारको परीक्षण करने की अनुमति दे दी है. नोएडा की रहने वाली 14 वर्षीय आरुषि तलवार और डॉ. तलवार के घरेलू नौकर हेमराज की 16 मई 2008 को जलवायु विहार स्थित डॉ. तलवार के घर में हत्या कर दी गई थी.

आरुषि और हेमराज की नृशंस हत्या की खबर लंबे समय तक भारतीय समाचार माध्यमों की सुर्खियां बनती रही थी. और नोएडा पुलिस और सीबीआई की तमाम कोशिशों के बावजूद इस मामले की गुत्थी सुलझ नहीं पायी है.

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दो हफ्ते पहले विशेष न्यायालय में इस बात की अर्जी दी थी. और आज मंगलवार को न्यायाधीश प्रीति सिंह ने सीबीआई को आरुषि के माता-पिता का नारको परीक्षण करने की औपचारिक अनुमति दे दी. अर्जी दाखिल करने से पहले सीबीआई ने डॉ. राजेश और नूपुर तलवार से इस बात की लिखित अनुमति ले ली थी.

डॉ. राजेश तलवार ने स्थानीय मीडिया को बताया, "पिछले साल भी सीबीआई ने नारको टेस्ट की योजना बनाई थी और उस समय भी मैंने और मेरी पत्नी ने सीबीआई को इसकी अनुमति दे दी थी. लेकिन उस सीबीआई ने केवल ब्रेन मैपिंग और कुछ दूसरे परीक्षण किये थे लेकिन नारको टेस्ट नहीं किया था. और इस बार भी हमें नारको टेस्ट किये जाने पर कोई आपत्ति नहीं है."

आरुषि की मां डॉ. नूपुर तलवार ने कहा, "सीबीआई ने हमसे कहा कि आरुषि को न्याय दिलाने के लिये ऐसा किया जाना जरूरी है. हमें टेस्ट में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन सीबीआई को इसकी तह तक जाना चाहिये ताकि दोषियों को सजा दी जा सके."

नारको परीक्षण

इस परीक्षण में विशेषज्ञ चुने गये व्यक्ति को एक विशेष दवा देते हैं जिस 'सच्चाई की औषधि या ट्रुथ सीरम' भी कहा जाता है. इसके इस्तेमाल के बाद अर्ध सुप्तावस्था में चला जाता है और उसके प्रतिरोध की क्षमता समाप्तप्राय हो जाती है.

ऐसी हालत में उससे जो प्रश्न पूछे जाते हैं उनके सत्य होने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि इस तकनीक का प्रयोग विवादास्पद और भारत में इस तरह से हासिल किये गये बयान को कानूनी मान्यता नहीं मिली है.

सर्वोच्च न्यायालय अभी इसकी वैधानिकता पर विचार कर रहा है. लेकिन जांच एजेंसियों को इस परीक्षण के दौरान काफी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं जिसके प्रयोग से मामले को सुलझाना या अतिरिक्त प्रमाण हासिल करना उनके लिये आसान हो जाता है.
 
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