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Page last updated at 15:24:41 IST, Tuesday, 26 January 2010 |
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61वें गणतंत्र दिवस पर भव्य परेड और रंगारंग कार्यक्रम
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मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, जनवरी 26, 2010 |
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राजपथ पर भारतीय सेना की टुकड़ी (फाइल) |
देश भर में इस अवसर अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये. नई दिल्ली में तीनों सेनाओं ने राजपथ पर सैन्य शक्ति का शानदार प्रदर्शन किया. परेड के अंत में राज्यों ने रंग-बिरंगी झांकियां निकालकर भारत की सांस्कृतिक विविधता से लोगों को परिचित कराया.
रायसीना हिल से परेड का आरंभ हुआ हालांकि आज मंगलवार सुबह राजपथ पर घना कोहरा था जिसकी वजह से हेलीकॉप्टरों द्वारा परेड पर फूल बरसाये जाने की परंपरा को पूरा नहीं किया जा सके.
इससे पहले राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और इस वर्ष गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली-म्यूंगबाक को 21 तोपों की सलामी दी गई. इसके अलावा प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, रक्षामंत्री, एके अन्टोनी, तीनों सेनाओं के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी इस मौके पर उपस्थित थे.
इस वर्ष परेड का नेतृत्व दिल्ली में थलसेना के जनरल ऑफिसर कमाण्डिंग मेजर जनरल केजेएस ओबराय ने किया. परेड में सबसे आगे परमवीर चक्र विजेता थे इसके बाद अशोक चक्र विजेता और इनके तुरंत बाद 61वीं घुड़सवार दस्ते के जवान परेड में शामिल थे.
सेना ने इस बार परेड में अग्नि-3 प्रक्षेपास्त्र के अलावा, मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, स्मर्च बहुनली राकेट सिस्टम, अस्थायी पुल बनाने वाले उपकरणों के साथ अत्याधुनिक राडारों का भी प्रदर्शन किया.
सैन्य दस्ते राजपथ पर घने कोहरे में भी कदम से कदम मिलाकर शान से चल रहे थे. इस परेड में राजपूत, सिक्ख. जाट, गोरखा और डोगरा रेजीमेंटों के साथ नौसेना और वायुसेना के दस्तों ने भी हिस्सा लिया.
 राजपथ पर अर्ध सैनिक बल (फाइल) |
इसके बाद अर्ध सैनिक बलों, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के दस्ते राजपथ से परेड करते हुये गुजरे.
इसके बाद शुरू हुई सांस्कृतिक झांकियों का सिलसिला जिसमें राज्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और क्षेत्रीय संस्कृतियों और विविधता से परेड में उपस्थित लोगों को परिचित कराया.
परेड से पहले प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री और तीनों सेनाध्यक्षों ने इण्डिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर पुष्प चढ़ाये.
परेड पर आतंकी खतरे का साया
हालांकि इस विशिष्ट आयोजन पर आतंकी हमले के खतरे को देखते हुये सुरक्षा के जोरदार प्रबंध किये गये थे. सुरक्षा एजेंसियों ने 15 हजार से ज्यादा जवानों को सुरक्षा के लिये तैनात किया था.
लश्कर द्वारा आत्मघाती हमले करने के लिये पैरा-ग्लाइडर के प्रयोग की आशंका को देखते हुये संवेदनशील स्थानों पर विमानभेदी तोपों को तैनात किया गया था.
सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि लश्कर ने यूरोप से 50 पैरा-ग्लाइडिंग उपकरण खरीदे हैं जिनका उपयोग भारत पर आतंकी हमले करने में किया जा सकता है.
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