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सर्वोच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठों के गठन के पक्ष में नहीं हैं मुख्य न्यायाधीश
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, जनवरी 30, 2010
 
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केजी बालाकृष्णन सर्वोच्च न्यायालय के विभाजन के खिलाफ
मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने कानून आयोग की उस सिफारिश का विरोध किया है जिसमें आयोग ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नै में सर्वोच्च न्यायालय की चार क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने को कहा था.

रविवार को मीडिया से बात करते हुये मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "मैं सर्वोच्च न्यायालय के विखण्डन के पक्ष में नहीं हूं. व्यक्तिगत तौर पर मैं महसूस करता हूं कि सर्वोच्च न्यायालय देश के किसी अन्य हिस्से में नहीं हो सकता है. ये देश का सर्वोच्च न्यायालय है और ये राजधानी में स्थित है."

उन्होंने कहा, "ये सर्वोच्च न्यायालय है और हमें इसकी गरिमा को बनाये रखना होगा."

हालांकि उन्होंने माना कि लंबित मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिये सर्वोच्च न्यायालय के पुनर्गठन में कोई नुकसान नहीं है.

पिछले वर्ष कानून आयोग ने सरकार को सुझाव दिया था कि चार महानगरों में सर्वोच्च न्यायालय में चार पीठें स्थापित की जायें और दिल्ली स्थित सर्वोच्च न्यायालय की पीठ को संवैधानिक पीठ का दर्जा दिया जाये.

विधि और न्याय मंत्रालय ने इस पर भारत के महान्यायवादी जीई वाहनवती से परामर्श किया था. उनकी राय भी सर्वोच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठों के गठन के पक्ष में नहीं थी.
 
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