कारपोरेट क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा से सरकारी निर्णय प्रक्रिया पर असर: दूरसंचार मंत्री
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, फरवरी 01, 2010
दूर संचार मंत्री ए राजा ने कहा है कि निजी कंपनियों की आपसी लड़ाई की वजह से सरकारी टेलीफोन कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड के विस्तार कार्यक्रमों पर असर पड़ रहा है.
ए. राजा ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर कहा बीएसएनएल की जरूरत पूरा करने के लिये 36,000 हज़ार करोड़ रुपये के उपकरण खरीदने के लिये नया टेण्डर भी जारी किया जाता है तो निजी कंपनियां इसे भी चुनौती दे सकती हैं.
ए राजा ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन कारणों का जिक्र किया जिनकी वजह से बीएसएनल की महत्वाकांक्षी विस्तार योजना पर विराम लगा हुआ है.
घपलेबाजी की आशंका की वजह से सतर्कता विभाग के अधिकारियों ने बीएसएनएल से नया टेण्डर जारी करने की संस्तुति की थी.
दो साल पहले बीएसएनएल ने अपनी क्षमता में 9 करोड़ तीस लाख अतिरिक्त जीएसएम मोबाइल फोन लाइनें जोड़ने क लिये उपकरणों की आपूर्ति के लिये टेण्डर जारी किया था. जिसमें एक प्रमुख आवेदक नोकिया सीमेन्स नेटवर्क (एनएसएन) की बोली को तकनीकी कारणों के आधार पर रद्द कर दिया गया था.
उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के लिये स्वीडन की कंपनी एरिक्सन की बोली सबसे कम थी. जबकि दक्षिण भारत के लिये चीन की कंपनी हुआवे को चुना गया था.
लेकिन नोकिया-सीमेन्स गठबंधन ने इसे दो उच्च न्यायालयों में चुनौती दी थी. लेकिन दोनों ही उच्च न्यायालयों ने बीएसएनएल के निर्णय को सही ठहराया था.
ए. राजा ने प्रधानमंत्री को लिखा, "आप ये मानेंगे की ऐसी परम्परा विकसित हो रही है जिसमें निजी कंपनियों की आपसी होड़ का असर सरकार के निर्णयों पर पड़ रहा है."
दूरसंचार मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि बीएसएनएल को क्षमता विस्तार के लिये ये उपकरण प्राथमिकता के आधार पर चाहिये ताकि वो ग्राहकों को नये कनेक्शन दे सके.
ए राजा ने चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में और विलंब होने पर बीएसएनएल की मोबाइल कनेक्शन बाजार में हिस्सेदारी और गिर सकती है.