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बजट 2010: आयकर दाताओं को राहत, कार खरीदना, गाड़ी चलाना महंगा
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, 26 फरवरी, 2010
 
Pranab Mukherjee at Parliament on Friday.jpg
आयकर स्लैब में बदलाव से मध्यवर्ग को राहत
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने वित्तीय वर्ष 2010-11 के बजट में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत दी है. वित्तमंत्री ने सालाना एक लाख साठ हजार रुपये की आय पर शून्य कर की सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया है.

लेकिन दस प्रतिशत आयकर की दर के लिये आय सीमा को एक लाख साठ हजार से तीन लाख की जगह पांच लाख करने का उनका निर्णय मध्यम वर्ग के वेतन भोगियों के लिये बहुत बड़ी राहत बनकर आया है.

इसके ऊपर आय वाले लोगों को पांच लाख से आठ लाख तक की आय पर 20 प्रतिशत और आठ लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक आय पर तीस प्रतिशत की दर से आयकर देना होगा.

लेकिन मध्यम वर्ग को राहत देने के बाद प्रणब मुखर्जी ने उसे एक झटका भी दिया. उन्होंने उत्पाद कर की सबसे कम दर को आठ से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया. सरकार ने मंदी से निपटने के लिये प्रोत्साहन पैकेज के हिस्से के तौर पर सामान्य उत्पाद कर की दर को आठ प्रतिशत कर दिया था.

Maruti-Suzuki-A-Star.jpg
कार खरीदना, गाड़ी चलाना महंगा हुआ
कुछ जानकार इसे प्रोत्साहन पैकेज की वापसी की शुरुआत के तौर पर भी देख रहे हैं. इसकी वजह से कारों, वातानुकूलित यंत्रों, पोर्टलैण्ड सीमेंट की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है. कई कार निर्माताओं ने बजट वाले दिन ही कारों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर दी है.

सरकार ने सबसे बड़ा झटका कच्चे तेल पर शुल्क 5 से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत और डीजल, पेट्रोल और दूसरे रिफाइन्ड उत्पादों पर 7.5 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करके दिया है. इसकी वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें ढाई से तीन रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गयी हैं.

हालांकि शेयर बाजार में वित्तमंत्री के वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के बयान के बाद चार सौ से ज्यादा अंकों की तेजी देखी गयी जो कि शाम होते-होते घटकर आधे से भी कम रह गयी.

मध्यम वर्ग को जो राहत करों के रूप में दी गयी थी उसके आधार पर विशेषज्ञों ने कहा था कि अलग-अलग आयवर्ग के लोगों को सालाना पचास हज़ार रुपये तक की सीधी बचत होगी. सरकार ने मध्यम वर्ग के हाथ में ज्यादा पैसा तो दिया लेकिन इसकी खुशी उस समय उड़नछू हो गयी जब शाम को कार निर्माताओं ने कीमतें बढ़ाने की घोषणा शुरू की.

पेट्रोल-डीजल के महंगे होने का पता तो बजट भाषण में ही चल गया था लेकिन अच्छी जीवन शैली की अभिलाषा रखने वाले मध्यवर्ग के लिये दूसरा झटका बजट की खुशी काफूर करने के लिये काफी है.

डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर ढुलाई भाड़े पर पड़ता है. जानकारों को अंदेशा है कि इससे महंगाई बढ़ने का सिलसिला और तेज होगा और लाख सरकारी दावों के बावजूद लोगों को इसके साथ रहना सीखना होगा.
 
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