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पहली बाधा पार: महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पारित
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, मार्च 09, 2010
 
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286 ने पक्ष में और 1 सांसद ने विरोध में मत दिया
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, जो कि राज्यसभा के सभापति भी हैं, ने मतदान के बाद कहा, "मैं समझता हूं कि विधेयक को आवश्यक बहुमत से पारित कर दिया गया है. उन्होंने कहा 186 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया और एक सांसद ने इसके विरोध में मतदान किया.

विधेयक के पारित होने के बाद कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा सभापति को संबोधित करते हुये कहा, "सरकार सदस्यों द्वारा बहस के दौरान उठाये गये बिंदुओं पर विचार करेगी."

इससे पहले आज दिन में इस मुद्दे पर जमकर राजधानी दिल्ली में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहा. ममता बनर्जी ने यह कहते हुये मतदान से अलग रहने का निर्णय लिया कि इस विधेयक के संबंध में उनसे विचार नहीं किया गया. उनकी पार्टी के राज्यसभा में दो सांसद हैं.

बहुजन समाजवादी पार्टी के 15 सदस्य भी मतदान से ठीक पहले सदन से बाहर चले गये.

प्रधानमंत्री ने विधेयक के समर्थन में बयान दिया था कि यह विधेयक अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति जनजातियों का विरोधी नहीं है.

बहस के दौरान सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने के लिये श्री अंसारी ने सात सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिये निलंबित कर दिया.

प्रधानमंत्री के बुलाने पर आज सुबह लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह और शरद यादव ने आज प्रधानमंत्री निवास में उनसे मुलाकात करके दलित, पिछड़े वर्ग की और अल्पसंख्यक महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की मांग की.

राज्यसभा में पारित होने के बाद इस ऐतिहासिक विधेयक ने पहली अड़चन पार कर ली है. अब सरकार इसे लोकसभा में पारित करवाने की कोशिश करेगी. यदि यह लोकसभा में भी पारित हो जाता है तो राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जायेगा.

245 सदस्यों वाली राज्यसभा में इस समय 233 सदस्य हैं. विधेयक को पारित करवान के लिये 155 सदस्यों के मतों की आवश्यकता थी जबकि विधेयक के पक्ष में 186 मत पड़े.

विधेयक के कानून बनने की हालत में लोकसभा की 543 में से 181 और 28 राज्य विधानसभाओं की कुल 4,109 सीटों में से 1,370 को महिलाओं के लिये आरक्षित हो जायेंगी.
 
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