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लालकृष्ण आडवाणी ने 6 दिसंबर को अयोध्या में भड़काऊ भाषण दिया था: अंजू गुप्ता
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मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, मार्च 26, 2010 |
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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद ढांचा |
1990 बैच की आईपीएस अधिकारी अंजू गुप्ता ने रायबरेली में इस मामले की सुनवाई कर रहे एक विशेष सीबीआई न्यायालय में अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाही देते हुये ऐसा कहा.
अयोध्या आंदोलन के दौरान अंजू गुप्ता श्री आडवाणी के व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी के तौर पर नियुक्त की गयी थीं और वह 6 दिसंबर को उनके साथ अयोध्या में मौजूद थीं.
उन्होंने न्यायालय को बताया कि श्री आडवाणी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा था कि मंदिर ठीक उसी जगह पर बनेगा जहां विवादित ढांचा स्थित है.
न्यायालय में दिये अपने बयान में उन्होंने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी के अलावा मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती के अलावा साध्वी ऋतम्भरा भी वहां उपस्थित थीं और इन लोगों ने भी बार-बार दोहराया कि प्रस्तावित राम मंदिर ठीक उसी जगह बनेगा.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि अंजू गुप्ता ने न्यायालय को बताया कि आडवाणी ने उनसे पूछा जरूर था कि गुंबद के पास क्या हो रहा है. और उन्होंने श्री आडवाणी को बताया कि कि कुछ कार सेवक गुंबद पर चढ़ चुके हैं जिनके हाथों में कुदाले, फावड़े और दूसरे औजार हैं.
 आडवाणी की मुश्किलें बढ़ीं |
अपने बयान में अंजू गुप्ता ने न्यायालय को बताया कि उस समय श्री आडवाणी ने गुंबद के निकट जाकर कार सेवकों से नीचे उतर आने की अपील करने के लिये वहां जाने की इच्छा उनके सामने जाहिर की.
लेकिन दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने के बाद उन्होंने श्री आडवाणी से कहा कि इस समय उनका वहां जाना ठीक नहीं रहेगा. क्योंकि यदि उनको लेकर कोई दुर्घटना होती है तो कारसेवकों पर नियंत्रण करना बहुत मुश्किल होगा.
अंजू गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि विवादित भवन के गिरने के बाद वहां खुशी का माहौल था और वहां मिठाइयां भी बांटी गयी थीं.
अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 तारीख को होगी. जब बचाव पक्ष उनसे सवाल-जवाब का सिलसिला दोबारा शुरू किया जायेगा.
पहले विशेष न्यायालय ने श्री आडवाणी पर इस घटना का षड़यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और लोगों को उकसाने के आरोप लगाये थे. बाद में श्री आडवाणी के खिलाफ षड़यंत्र रचने के आरोप को वापस ले लिया गया था.
2003 में एनडीए सरकार के समय श्री आडवाणी के खिलाफ लगाये गये अभियोग वापस ले लिये गये थे.
लेकिन यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान सन 2005 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने उनके खिलाफ दंगे भड़काने, लोगों को उकसाने और विवादित ढांचे को गिराने का षड़यंत्र रचने में से कुछ आरोपों को फिर से लगाने का निर्णय लिया था.
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