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जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे में 58 दलितों को मौत के घाट उतारने के मामले में 16 लोगों को मृत्युदण्ड
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, अप्रैल 07, 2010
 
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लक्ष्मणपुर-बाथे नरसंहार के मामले में 16 को फांसी की सजा
1997 में 58 दलितों की हत्या के दोषी पाये गये 26 में से 19 लोगों को बिहार के एक न्यायालय ने मौत की सजा सुनायी है. अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विजय प्रकाश मिश्र ने शेष 10 लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी और उनसे पचास हज़ार रुपये जुर्माना भी वसूले जाने का आदेश दिया.

रणवीर सेना के सदस्यों ने 1 दिसंबर 1997 को दलितों के इस गांव पर हमला करके 58 लोगों को बड़ी ही नृशंसता के साथ मौत के घाट उतार दिया था.

23 दिसंबर 2008 को इस मामले में रणवीर सेना के 46 सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किये गये थे. इस मामले के 152 गवाहों में से 91 ने न्यायालय के समक्ष इस मामले में अपने बयान दिये थे.

जिन लोगों को फांसी की सजा दी गयी है उनके नाम इस प्रकार हैं: नवल सिंह, बलिराम सिंह, नन्दू सिंह, गिरिजा सिंह, सुरेंद्र सिंह, अशोक सिंह, गोपाल शरण सिंह, बालेश्वर सिंह, प्रमोद सिंह, शत्रुघ्न सिंह, द्वारका सिंह, विजेंद्र सिंह, शिवमोहन शर्मा, रामकेवल शर्मा, धर्म सिंह, नंद सिंह.

इनके अलावा सुनील कुमार, प्रमोद कुमार, चंद्रेश्वर सिंह, बबलू शर्मा, अशोक सिंह, अशोक सिंह, मिथिलेश शर्मा, धरीक्षण चौधरी, नवीन कुमार, रवींद्र सिंह और सुरेंद्र सिंह को आजीवन कारावास की सजा दी गयी है.

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वह उच्च न्यायालय में इस निर्णय के विरुद्ध अपील करेंगे.
 
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