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स्वदेश में विकसित क्रॉयोजेनिक इंजिन पर आधारित पहले जीएसएलवी-डी3 रॉकेट का प्रक्षेपण असफल
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, अप्रैल 15, 2010
 
GSLV-D3.jpg
स्वदेश में विकसित क्रायोजेनिक तकनीक वाले पहले रॉकेट का प्रक्षेपण असफल
इस असफलता को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिये बहुत बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है. स्वदेश में विकसित क्रायोजेनिक इंजिन पर आधारित पहले जीएसएलवी-डी3 रॉकेट का आज बृहस्पतिवार को श्रीहरिकोटा से हुआ प्रक्षेपण सफल नहीं रहा.

बृहस्पतिवार शाम को चार बज कर सत्ताइस मिनट पर इस रॉकेट को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था लेकिन दागे जाने के 5 मिनट बाद ही यह रॉकेट अपने मार्ग से रास्ता भटक कर समुद्र में जा गिरा.

इसरो के अध्यक्ष राधाकृष्णन ने इस अभियान को असफल बताया है. उन्होंने कहा कि लगता है कि मुख्य नियंत्रण केंद्र ने रॉकेट के ऊपर अपना नियंत्रण खो दिया था.

यह प्रक्षेपण यान स्वदेश में निर्मित जीसैट-4 उपग्रह को अंतरिक्ष की भूस्थैतिकी कक्षा में स्थापित करने के लिये भेजा जा रहा था.
GSAT-4-Satellite.jpg
रॉकेट के साथ जीसैट-4 उपग्रह भी नष्ट
इस अभियान के असफल होने से इस रॉकेट पर सवार उपग्रह भी नष्ट हो गया है.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या तबतक क्रॉयोजेनिक इंजिनों को चालू किया जा चुका था या नहीं.

इसरो ने कहा है कि इसकी जांच में अगले कुछ दिनों में इस बात का सही-सही पता लगाया जा सकेगा कि क्या इन इंजिनों को दागा जा चुका था?

श्री राधाकृष्णन ने भरोसा दिलाया कि अगले एक साल में स्वदेशी क्रॉयोजेनिक से युक्त अगले जीएसएलवी रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया जायेगा.
 
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