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रिजर्व बैंक ने छोटी अवधि के कर्ज और कैश रिजर्व रेशियो में चौथाई प्रतिशत की वृद्धि की
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मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, अप्रैल 20, 2010 |
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महंगाई नियंत्रण के लिये आरबीआई ने कर्ज महंगा किया: डी. सुब्बाराव |
मुद्रा स्फीति और महंगाई पर नियंत्रण करने के लिये रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ने बैंको के लिये छोटी अवधि के ऋण लेने को महंगा बना दिया है.
रिजर्व बैंक ने रेपो और रिवर्स रेपो रेट और तरल नकदी अनुपात (सीआरआर) में चौथाई प्रतिशत की वृद्धि कर दी है.
विशेषज्ञों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य महंगाई पर लगाम लगाना है.
रेपो दर, वह दर जिस पर दूसरे बैंक रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं, को पांच से बढ़ाकर सवा पांच प्रतिशत कर दिया गया है.
जबकि इसके विपरीत रिवर्स रेपो दर, वह दर जिस पर अन्य बैंक अपना अतिरिक्त धन रिजर्व बैंक के पास जमा करते हैं, को साढ़े तीन से बढ़ाकर पौने चार प्रतिशत कर दिया गया है.
इसके अलावा कैश रिजर्व रेशियो, वह धन जो बैंको को अलग रखना होता है और जिसे वह कर्ज देने में इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, को पौने 6 से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया गया है.
जानकारों के अनुसार अकेले सीआरआर में चौथाई प्रतिशत की वृद्धि से बैंको के पास उपलब्ध कर्ज देने योग्य धन में साढ़े बारह हजार करोड़ रुपये की कमी हो जायेगी.
सीआरआर में वृद्धि 24 अप्रैल यानी शनिवार से लागू हो जायेगी.
हालांकि रिजर्व बैंक ने यह कदम उठाकर बैंको को संकेत दिया है कि वह कर्ज देने कुछ नियंत्रण करें.
लेकिन प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कुछ बैंको ने कहा है कि आरबीआई के इस कदम का बोझ वह कर्ज लेने वाले अपने ग्राहकों पर नहीं डालेंगे क्योंकि अभी भी बाजार में अतिरिक्त तरल धन मौजूद है.
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