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कसाब को सजा-ए-मौत
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, मई 06, 2010
 
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कसाब को जिंदा रखना खतरनाक: न्यायालय
मुंबई की आर्थर रोड जेल में इस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायालय ने पाकिस्तानी हमलावर अजमल आमिर कसाब को फांसी की सजा सुनायी है. न्यायाधीश एम. एल. ताहिलियानी ने कहा कि इस तरह के आतंकवादी को जीवित रखना समाज और भारत सरकार के लिये खतरनाक साबित हो सकता है.

उन्होंने पांच मामलों में 22 वर्षीय कसाब को मृत्युदण्ड दिया. इसमें शामिल है हत्या, हत्या का षड़यंत्र, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना, हत्या के लिये उकसावा देना और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिये गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून के अन्तर्गत मृत्युदण्ड.

इसके अलावा पांच अन्य तरह के अपराधों के लिये भी उसे सजा सुनायी गयी है.


"न्यायालय का विचार है कि कसाब के सुधरने की कोई संभावना नहीं है. ऐसे आतंकवादी को जिंदा रखना समाज और भारत सरकार के लिये खतरनाक है," न्यायाधीश ताहिलियनानी ने सजा सुनाते हुये कहा.

विद्वान न्यायाधीश ने कंधार विमान अपहरण मामले का उदाहरण भी दिया जिसमें बंधक लोगों को छुड़ाने के लिये आतंकवादियों को रिहा करना पड़ा था.

श्री ताहिलियानी ने कहा, "यदि कसाब को जिंदा रखा जाता है तो ये हालात फिर से पैदा हो सकते हैं."

उन्होंने कहा कि कसाब स्वेच्छा से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती हुआ था और मुजाहिदीन (धर्म योद्धा) बनने का प्रस्ताव संगठन के सामने रखा था.
 
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