पंचायतों और स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षण को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, मई 11, 2010
पंचायतों में पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षण को मंजूरी
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि पंचायतों और ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़े वर्गों के लिये स्थान आरक्षित करने का कदम पूरी तरह से संविधान के अनुरूप है. न्यायालय ने विरोधियों की इस दलील को भी ठुकरा दिया कि इससे क्रीमी लेयर को बाहर रखा जाये.
हालांकि सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की पीठ ने कहा कि आरक्षण का लाभ पचास प्रतिशत सीटों के आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिये. हालांकि कुछ विशेष सूचीबद्ध क्षेत्रों को इस ऊपरी सीमा से बाहर रखा गया है.
इस पीठ में न्यायाधीश आर. वी. रवींद्रन, डी. के. जैन, पी. सथाशिवम और जे. पंचाल शामिल थे.
पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का उद्देश्य केवल इतना ही नहीं है कि सरकार को जनता के करीब ले जाया जाये...बल्कि इसका उद्देश्य समाज के पिछड़े और दलित वर्गों को इसमें भागीदारी देना भी है.