हिंसा त्यागने वाले किसी भी समूह से वार्ता के लिये तैयार: प्रधानमंत्री
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, अगस्त 15, 2010
हिंसा का रास्ता छोड़े तो वार्ता के लिये तैयार: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 64वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में यह बात कही. उन्होंने नक्सलवाद को आतंरिक सुरक्षा के लिये सबसे बड़ा खतरा बताते हुये कहा कि इस खतरे से निपटने के लिये संकीर्ण व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठने की आवश्यकता है.
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर माओवादी चरमपंथियों और कश्मीर अलगाववादियों को बातचीत के लिये आगे आने का प्रस्ताव देते हुये कहा कि जो भी समूह हिंसा छोड़कर बातचीत के लिये आगे आना चाहते हैं सरकार उनसे बात करने को तैयार है.
हालांकि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि बातचीत करने का मतलब ये नहीं है कि उनकी सरकार हिंसा से सख्ती से निपटने में अक्षम है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा से दृढ़तापूर्वक निपटेगी.
कश्मीर के हालात पर बोलते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उनकी सरकार का प्रयास है कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाये लेकिन इसके लिये हिंसा का रास्ता त्यागना होगा.