मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, अगस्त 25, 2010
अमेरिका परस्त होने का आरोप गलत: प्रधानमंत्री
लोकसभा ने बुधवार को लंबी बहस के बाद विपक्ष द्वारा प्रस्तावित कुछ बदलावों को नकारते हुये परमाणुवीय नुकसान के लिये सिविल उत्तरदायित्व विधेयक 2010 को ध्वनि मत से पारित कर दिया है.
इस विधेयक में सरकार द्वारा प्रस्तावित 18 बदलावों को शामिल किया गया है. इसमें सबसे अहम है किसी नाभिकीय दुर्घटना के लिये क्षतिपूर्ति राशि को 500 करोड़ से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये किया जाना. इसके तहत परमाणु कारखाने के संचालक की जिम्मेदारी होगी कि वह पीड़ितों को हर्जाना देने के बाद ही उपकरण आपूर्ति कर्ता कंपनी के साथ दोबारा काम शुरू कर पायेगा.
इसके अलावा अधिनियम 17 की भाषा में भी सरकार ने बदलाव किये हैं ताकि कोई दुर्घटना होने की स्थिति में आपूर्तिकर्ता कंपनी की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.
विपक्ष ने 'मंशा या आशय' शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुये कहा था कि कोई दुर्घटना होने की स्थिति में आपूर्तिकर्ता कंपनी की मंशा को प्रमाणित करना आसान नहीं होगा. इसके बाद सरकार ने इस शब्द को हटाने का निर्णय लिया.
विज्ञान एवं तकनीक मंत्री पृथ्वीराज चाह्वान ने सदन को भरोसा दिलाया कि इससे भारत में परमाणु शोध के कार्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
उनके पहले इस मुद्दे पर चल रही बहस में विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के कानून बन जाने से भारत के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. प्रधानमंत्री ने अमेरिका की पक्षधरता करने का विपक्ष द्वारा अपने ऊपर लगाया गया आरोप भी नकार दिया.