मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस नई दिल्ली, जनवरी 27, 2012
डीजल कारों पर टैक्स बढ़ सकता है
डीजल कार के खरीदारों को संभवत: अपनी जेब अधिक ढीली करनी होगी। वित्त मंत्रालय डीजल वाहनों पर ऊंचा उत्पाद शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इस तरह का प्रस्ताव आगामी बजट में पेश हो सकता है।
निजी वाहन मालिकों द्वारा सब्सिडी वाले डीजल के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को इस तरह के वाहनों पर अधिक उत्पाद शुल्क लगाने का सुझाव दिया है।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम डीजल कारों पर ऊंचे उत्पाद शुल्क के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। एक तरह जहां पेट्रोलियम मंत्रालय डीजल कारों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरह भारी उद्योग मंत्रालय इसका विरोध कर रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की दलील है कि अधिक उत्पाद शुल्क से मिलने वाली अतिरिक्त राशि से तेल विपणन कंपनियों के घाटे की भरपाई की जा सकती है। तेल विपणन कंपनियों को आयात मूल्य से कम पर बिक्री के कारण 2011-12 में डीजल की बिक्री पर करीब 82,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
ऊंचे उत्पाद शुल्क से अर्थव्यवस्था के डीजलीकरण को भी रोका जा सकेगा। ऊर्जा पर किरीट पारेख समिति ने भी डीजल कारों पर एकबारगी 80,000 रुपये का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का सुझाव दिया है। समिति का मानना है कि इससे पेट्रोल पर ऊंचे उत्पाद शुल्क के दबाव को कम किया जा सकेगा।