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थल सेनाध्यक्ष वी. के. सिंह की याचिका पर 3 फरवरी को सुनवाई
मेरी सरकार न्यूज़ सर्विस नई दिल्ली, जनवरी 27, 2012
 
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सभी विकल्पों को आजमाने के बाद पहुंचे न्यायालय
सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तीन फरवरी को सुनवाई करेगी। याचिका में उन्होंने सरकार को यह निर्देश देने को कहा कि वह उनकी जन्मतिथि 10 मई 1950 के बजाए 10 मई 1951 माने। इस हफ्ते की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर एक जनहित याचिका को खारिज कर चुकी है।

दरअसल, देश के इतिहास में पहली बार सेना प्रमुख सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए हैं। सरकार सेनाध्यक्ष वीके सिंह की जन्मतिथि 10 मई 1950 मान रही है, लेकिन सिंह अपनी जन्मतिथि 10 मई 1951 बता रहे हैं। सेना प्रमुख को 31 मई 2012 को रिटायर होना है।

अपनी 68 पन्नों की याचिका में जनरल सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार का उनके प्रति जो रवैया है उससे उनकी उम्र के निर्धारण में प्रक्रिया और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की कमी झलकती है।

सेनाध्‍यक्ष ने रक्षा मंत्रालय में मौजूद सभी विकल्पों को आजमाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की। रक्षा मंत्रालय ने उनकी उस दलील को खारिज कर दिया था कि उनका जन्म 1950 में नहीं, बल्कि 1951 में हुआ था।

सेनाध्यक्ष ने याचिका दायर कर आग्रह किया है कि उनकी जन्मतिथि 10 मई 1951 मानी जाए। यह सारा विवाद सेना प्रमुख वीके सिंह की दो अलग-अलग जन्म तिथि की वजह से खड़ा हुआ है।

जनरल का कहना है कि एनडीए की परीक्षा का उनका फॉर्म उनके अंग्रेजी के शिक्षक ने भरा था, जिसमें गलती से उन्होंने 10 मई 1951 की जगह 10 मई 1950 लिख दिया था। इसी वजह से उनके सर्विस रिकॉर्ड्स में दो जन्मतिथि दर्ज हो गई।

जनरल के शिक्षक भटनागर के मुताबिक, 'मैंने उम्र अंदाज से भरी थी। उन्हें याद नहीं था। कुछ समय बाद राजस्थान बोर्ड से मार्कशीट आई उसमें 1951 ही लिखा था। एनडीए को देखना चाहिए।'

नियम के मुताबिक एनडीए में एडमिशन स्थाई तभी होता है जब स्कूल बोर्ड की मार्कशीट वहां जमा की जाती है। उससे पहले उसे प्रोविजनल माना जाता है। अगर जनरल वीके सिंह के शिक्षक का दावा सही है कि बोर्ड मार्कशीट में जन्मतिथि 1951 ही थी तो एनडीए ने यह चूक नहीं पकड़ी।

कोर्ट तक बात इसलिए पहुंची क्योंकि सरकार वीके सिंह की दलीलों से सहमत नहीं है। तिथि सुधारने की कोई अपील सरकार ने स्वीकारी नहीं है। जनरल भी झुकने के लिए तैयार नहीं हैं।
 
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