भारत ने एक साथ 8 उपग्रहों को अलग-अलग कक्षा में स्थापित किया

प्रक्षेपण से पहले श्रीहरिकोटा में पीएसएलवी सी-35 (PSLV-C35)।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) ने सोमवार को श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी 35 राकेट के ज़रिये पहली बार एकसाथ दो अलग-अलग कक्षाओं में 8 उपग्रह स्थापित कर इतिहास रचा है।

उपग्रहों को लेकर इसरो का रॉकेट सोमवार की सुबह करीब 9 बजकर 12 मिनट पर रवाना हुआ।

371 किलोग्राम वजन वाला भारतीय उपग्रह स्कैटसैट-1 महासागर और मौसम संबंधी अध्ययन के लिए भेजा गया है।

इसरो ने पीएसएलवी के इंजन को अंतरिक्ष में दुबारा चालू करने में महत्‍वपूर्ण महारत इस साल जून और पिछले साल दिसम्‍बर के दौरान हासिल कर ली थी।

प्रक्षेपण से पहले SCATSAT-1 उपग्रह को पीएसएलवी सी-35 के साथ जोड़ा गया।

प्रक्षेपण से पहले SCATSAT-1 उपग्रह को पीएसएलवी सी-35 के साथ जोड़ा गया।

इनके ज़रिये वैज्ञानिकों ने एक प्रक्षेपण में कई उपग्रह अलग-अलग कक्षाओं में प्रक्षेपित करने की विशेषज्ञता हासिल कर ली।

देश के इस मौसम उपग्रह स्‍कैटसैट-1 को महत्‍वपूर्ण ओसियन सैट-2 का अगला सतत अभियान बताया गया है। ओसियन सैट-2 अपना कार्यकाल पूरा कर चुका है।

पीएसएलवी-सी35 अपने साथ 371 किलोग्राम वजन वाले स्कैटसैट-1 और सात अन्य उपग्रहों को लेकर गया, जिनमें अमेरिका और कनाडा के भी उपग्रह शामिल हैं। पीएसएलवी-सी 35 जिन आठ उपग्रहों को अपने साथ ले गया है उनका कुल वजन 675 किलोग्राम है।

प्रक्षेपण के करीब 17 मिनट बाद स्कैटसैट-1 को पहले 730 किलोमीटर वाली पोलर सनसिन्क्रोनस ऑर्बिट (एसएसओ) में जारी किया गया, जबकि बाकी को करीब दो घंटे के बाद 689 किलोमीटर वाली एक निचली कक्षा में स्थापित किया गया।

स्कैटसैट-1 के अलावा भारत के शैक्षणिक उपग्रहों- प्रथम और पीआईसैट – अल्जीरिया के अल्सैट-1बी, अल्सैट-2बी एवं अल्सैट-1एन और अमेरिका के पाथफाइंडर-1 एवं कनाडा के एनएलएस-19 को कक्षाओं में स्थापित किया गया।

इसरो के मुताबिक, यह पीएसएलवी का पहला मिशन है जिसके तहत उपग्रहों को दो अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित किया गया है। यह सामुद्रिक तथा मौसम संबंधी अध्ययन में सहायक होगा।

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